मंडला। जिले के 15 अगस्त 2022 को पूर्ण साक्षर जिला घोषित किया गया था,लेकिन आज तीन साल बाद जब साक्षरता का आंकडा देखें तो 66.87% है,जिससे अब सवाल उठ रहे है की क्या सिर्फ कागजों में मंडला जिला पूर्ण साक्षर है।
मंडला जिले को 15 अगस्त 2022 मे तत्कालीन कलेक्टर हर्षिका सिंह के द्वारा 100% साक्षर किया गया था। जब की कागजों पर ही साक्षरता सिमट कर रह गई,और ज़मीनी स्तर पर इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। आज भी साक्षरता कही दिखाई नहीं दे रही है और तो और शिक्षा का स्तर गिरते जा रहा है। आज भी आदिवासी समाज शिक्षा से कोसों दूर है। मामले को लेकर जब हमने सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग वंदना गुप्ता और जिला शिक्षा अधिकारी मुन्नी वर्कड़े से बात की तो उन्होने क्या कहा आप भी सुनिए।
वही मामले को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी प्रदेश अध्यक्ष और जिला शिक्षा समिति अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम का कहना है कि तत्कालीन कलेक्टर ने मंडला जिले के वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है। आज जब जिले के साक्षरता के आंकड़े देखा जाए तो 66.87% ही है,तीन सालों मे कैसे कम हो सकता है। इसका मतलब साफ है की सिर्फ कागजों पर ही सब को पढ़ा लिखा घोषित कर दिया गया है,जो जिले के लिए शर्मनाक बात है!


