उज्जैन में किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक, संत-भोज के साथ संगठन विस्तार और जिम्मेदारियों पर मंथन

उज्जैन में किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक, संत-भोज के साथ संगठन विस्तार और जिम्मेदारियों पर मंथन

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में किन्नर अखाड़े की बैठक का दूसरा दिन संत-भोज और पंडितों के भोज के साथ सम्पन्न हुआ। बैठक में अखाड़े के विस्तार, आगामी कुंभ मेलों की तैयारी और संतों को जिम्मेदारियां देने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

अखाड़े के पदाधिकारियों ने बताया कि बैठक में इस बात पर विचार किया जा रहा है कि आगे संगठन के कार्यों को कैसे बढ़ाया जाए और किस संत को कौन-सी भूमिका दी जाए। आने वाले समय में तीन कुंभ मेले होने वाले हैं, ऐसे में किन्नर अखाड़ा भी अपनी भूमिका को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि हाल ही में अखाड़े के प्रतिनिधियों ने मेला अधिकारियों से मुलाकात की थी, जहां उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। साथ ही प्रयास किया जाएगा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav से भी मुलाकात कर किन्नर समाज की मांगें रखी जाएं। इनमें उज्जैन में अन्य अखाड़ों की तरह किन्नर अखाड़े के लिए भी स्थायी स्थान, मंदिर और आश्रम की व्यवस्था करने की मांग प्रमुख है।

संतों ने कहा कि किन्नर अखाड़े के विस्तार में उज्जैन का विशेष योगदान रहा है। वर्ष 2016 के सिंहस्थ के दौरान यहां की जनता ने किन्नर समाज को अपनाया, जिसके कारण समाज को नई पहचान मिली। उन्होंने कहा कि यह सब महाकालेश्वर मंदिर और भगवान महाकाल की कृपा से संभव हुआ है।

बैठक में यह भी बताया गया कि अखाड़े के विस्तार के तहत देशभर से किन्नर समाज जुड़ रहा है। तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, बंगाल, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा थाईलैंड, श्रीलंका और अमेरिका के किन्नर भी अखाड़े से जुड़े हुए हैं।

संतों ने बताया कि अखाड़े के विस्तार के तहत नए पद भी दिए जा रहे हैं। हाल ही में दो महामंडलेश्वर और कई श्रीमहंत बनाए गए हैं, जिससे संगठन को और मजबूती मिलेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। किन्नर अखाड़ा बेटियों की शादी, अनाथ बच्चों की शिक्षा और विधवाओं की सहायता जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

उज्जैन में हुई इस बैठक में अखाड़े के संतों को अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारियां देने पर भी चर्चा हुई। भैरवगढ़ क्षेत्र में आश्रम से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए संतों को विशेष जिम्मेदारी सौंपने की बात भी सामने आई है।

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