सिख समाज द्वारा दया के समुद्र ,परमेश्वर स्वरूप श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी प्रकाश पर्व बहुत हर्ष उल्लास से मनाया गया. l

सिख समाज द्वारा दया के समुद्र ,परमेश्वर स्वरूप श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी प्रकाश पर्व बहुत हर्ष उल्लास से मनाया गया. l

उज्जैन।    गुरुद्वारा सुख सागर के अध्यक्ष श्री चरणजीत सिंह कालरा ने बताया कि सिख धर्म के नोवे गुरु तेग बहादुर जी का अवतार पर्व बहुत हर्ष उल्लास से मनाया गयाl प्रातः 9:00 बजे अखंड पाठ की समाप्ति हुई सभी प्रांत 9:30 से लेकर 10:30 बजे तक महिलाओं एवं पुरुषों द्वारा सुखमणि साहब का सामूहिक पाठ किया गया l स्त्री सत्संग की बीबी गुरबाणी कौर चावला इंदौर एवं बीबी संजोत कोर मोगा उज्जैन द्वारा कीर्तन किया गया l अरदास के उपरांत लंगर का वितरण किया गया l
जत्थेदार सुरेंद्र सिंह अरोरा ने बताया की दया के समुद्र परमेश्वर स्वरूप श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी को याद करने से नो निधियां, लोक परलोक के सुख झोली में पढ़ते हैं गुरुजी संसार के तप करने वाले हैं जीवो के सभी दुखों क्लेशों का नाश कर सुख देने वाले हैं lशरण में आए हुए लोगों की सहायता करने वाले हैं l दिन हिन के स्वामी है नानक निरंकारी ज्योति ने विश्व में जीवो के दुख दूर करने के लिए ही 10 शरीर धारण किए थे l गुरु साहिबान जीवन की मानसिक और शारीरिक गुलामी की जंजीरें तोड़कर मुक्ति प्रदान करने के लिए आए थे. l

सिख समाज उज्जैन के संभागीय प्रवक्ता एस.एस.नारंग ने बताया कि संसार के ताप हरने के लिए दुखों के नाश के लिए मानवता की मुक्ति के लिए गुरु जी के पास युक्ति है l नाम- सिमरन गुरु सबके दुख निवारण हार है गुरबाणी में मानव देव को नाम का बीज बोने के लिए उचित समय माना गया है श्री गुरु तेग बहादुर साहिब ने मानव देह(मनुष्य जन्म) को सिमरन द्वारा प्रभु से मिलने का अवसर बताया है l

एस.एस.नारंग ने बताया कि नवंबर 1675 ई. में कश्मीरी पंडितों का एक जत्था पंडित कृपाराम के नेतृत्व में गुरु जी से मिला और कश्मीर में औरंगजेब के धार्मिक अत्याचारों का विवरण दिया गुरु जी ने कश्मीरी पंडितों के मानव अधिकारों की रक्षा हेतु औरंगजेब की कट्टरता का विरोध करते हुए दिल्ली की चांदनी चौक में शीश कटवा कर शहादत दी l कार्यक्रम में सुरेंद्र सिंह अरोरा,चरणजीत सिंह कालरा , इकबाल सिंह गांधी, एस.एस.नारंग,प्रो.बी.एस.मक्कड़, मस्तान सिंह छाबड़ा, सुरजीत सिंह डंग ,जोगिंदर सिंह ठकराल ,दलजीत सिह गांधी , द्वारा समूह संगत को लख- लख बधाइयां दी गईl

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