आखिर कब तक लुटते रहेंगे ग्रामीण क्षेत्रों के आदिवासी

आखिर कब तक लुटते रहेंगे ग्रामीण क्षेत्रों के आदिवासी

झाबुआ।  जिला कलेक्टर द्वारा आदिवासी बाहुल्य जिले झाबुआ में नित्य नए नवाचार किए जा रहे हैं इधर जनपद पंचायत के बाबुओं के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के भोले भाले आदिवासियों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के नाम पर खुली रिश्वत ली जा रही है आखिर इन जनपद पंचायत के बाबुओं की ऐसी घिनौनी हरकत देखने वाले क्या जिले में कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं है।

मामला झाबुआ जिले के जनपद पंचायत मेघनगर का है मेघनगर के बाबू ने संबल योजना के नाम पर राशि स्वीकृत करने के नाम पर₹10000 दस हजार की रिश्वत लेने का आरोप ग्राम पंचायत गुवाली के बांदी सेरा के आदिवासी युवक संजय ने यह बड़ा आरोप लगाया है । युवक के पिता कैंसर पीड़ित थे कैंसर की बीमारी से मृत्यु हो गई थी । सरकार के द्वारा संबल योजना के अंतर्गत मृतक के परिवार वालो को 2 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता का संबल योजना के अंतर्गत है युवा ने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि अभी हाल ही में हुए मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में अपनी बहन का फॉर्म भरने के पश्चात ग्राम पंचायत के सचिव ने रिजेक्ट कर दिया। क्योंकि सचिव को भी₹10000 नहीं दिए तो उसका फॉर्म भी रिजेक्ट कर दिया यह बड़ा आरोप जनपद पंचायत मेघनगर के बाबू और ग्राम पंचायत के सचिव पर युवक ने लगाया है आखिर झाबुआ जिले के भोले भाले आदिवासी ग्रामीण इन जनपद पंचायत के बाबू व ग्राम पंचायत के सचिवों से कब तक लुटते रहेंगे सरकार एक और तो आदिवासी बाहुल्य जिलों में रह रहे गरीब आदिवासि परिवारों के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ इन ग्रामीणों को मिल सके देखने में यह अभी आया है कि आए दिन झाबुआ जिले में ऐसे अनेक आदिवासी ग्रामीणों ने आरोप प्रत्यारोप भी कर्मचारियों पर लगाए हैं परंतु अभी तक अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होना।  यह क्या यह जिला कलेक्टर या जिला प्रशासन में अधिकारियों की कमजोरी नहीं है आखिरी झाबुआ जिले में कब तक ग्रामीण आदिवासी लूटते रहेंगे वही जनपद पंचायत मेघनगर के मुख्यकार्यपालन अंतर सिंह डाबर अधिकारी ने पल्ला झाड़ते हुवे कहा की जांच कराई जाएगी ।

ब्यूरो शाबीर मंसूरी…

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *