मंडला। मध्य प्रदेश में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां पोस्टमॉर्टम के लिए एक महिला के डीकम्पोस्ड शव को उसके परिवार वालों के साथ ट्रैक्टर में 100 किलोमीटर तक ले जाया गया। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जिला चिकित्सालय में शवगृह में जगह न मिलने के कारण परिवार को पूरी रात शव के साथ पेड़ के नीचे बितानी पड़ी।
ट्रैक्टर से शव ले जाने के लिए मजबूर परिजन…आखिर कब व्यवस्थाओं में होगा सुधार ?…
पूरा मामला मंडला जिले का है,बुधवार को जिले की मवई थाना पुलिस ने एक पखवाड़ा पहले दफ़न किए महिला रतनी बाई के शव को एसडीएम से इजाजत लेकर बाहर निकाला गया था,दरअसल मृतिका एक कार्यक्रम के लिए रिश्तेदारों के घर गई थी ज़हां उसकी मौत हो गई थी परंपरानुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था बाद में भाई और पति ने पुलिस में हत्या की शिकायत की थी। जिसके बाद पुलिस ने मृग कायम कर कार्रवाई शुरू की। मृतक महिला के भाई ने कहा कि दफन शव को बाहर निकलवाने के बाद परिजनों के साथ ट्रेक्टर में मवई से बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया इस स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक नहीं होने के कारण मंडला जिला स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। मंडला पहुंचने के बाद शव पूरी रात अस्पताल के बाहर ट्रैक्टर में रखा रहा सुबह होने के बाद पोस्टमर्टम किया गया,लौटने के बाद भी उन्हे शव वाहन नहीं मिला जिसके चलते वह ट्रैक्टर पर शव ले जाने के लिए मजबूर हो गए।
वही मंडला सीएस डॉ विजय ने बताया कि शव का पोस्टमॉर्टम कर परिजनों को सौंपा है,हमारे संज्ञान में नहीं था कि ट्रैक्टर से शव लाया जा रहा है,वरना वाहन की व्यवस्था कराई जाती। वही पीएच मंत्री सम्पतिया उइके ने कहा कि बिछिया विधायक तत्काल शव वाहन को उपलब्ध कराए अगर वो नहीं कराते हैं तो हम सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शव वाहन उपलब्ध कराएंगे! फिलहाल मध्यप्रदेश में शव को वाहन नहीं मिलने का ये पहला मामला नहीं है,इसके पहले भी कई मामले सामने आ चुके है,जिसमें कभी परिजन ठेले पर तो कभी कंधों पर शव ले जाने के लिए मजबूर हो गए।
मंडला से सलीम खान की रिपोर्ट…


