अनूठी शादी…खामोशी से हुआ प्यार, बिना शब्दों के बंधी जिंदगीभर की डोर

अनूठी शादी…खामोशी से हुआ प्यार, बिना शब्दों के बंधी जिंदगीभर की डोर

धार। जिले में एक ऐसी अनोखी शादी हुई जिसके बारे में सुनकर हर किसी को सुकून मिलेगा। ये भावुक और प्रेरणादायक शादी हुई है धामनोद नगर में। यहां इंस्टाग्राम के जरिए हुई एक अनोखी दोस्ती ने अंतरजातीय मूकबधिर युवक व युवती को जीवनसाथी बना दिया। इस अनूठी शादी से दोनों के परिजन भी बेहद खुश हैं।

इंस्टाग्राम से शुरू हुआ था खामोश रिश्ता….शादी से दोनों के परिजन भी बेहद खुश 

जब शब्द मौन हो जाएं और दिल की आवाज़ सुनी जाए — तब जन्म लेती है एक ऐसी प्रेम कहानी जो समाज की सीमाओं को तोड़ देती है। धार जिले के धामनोद में हुई एक मूकबधिर जोड़े की अनोखी शादी ने ना सिर्फ भावनाओं की गहराई को दिखाया बल्कि इंसानियत, प्रेम और समर्पण की नई परिभाषा गढ़ दी। इंस्टाग्राम से शुरू हुई खामोश मोहब्बत जल्दी ही विवाह में बदल गई, दरअसल आज के दौर में जहां मूकबधिर बच्चों की शादी, माता-पिता के लिए एक बड़ी चिंता का विषय होती है, वहीं धामनोद में एक भावुक और प्रेरणादायक मामला सामने आया है। यहां इंस्टाग्राम के जरिए हुई एक अनोखी दोस्ती ने जहां अंतरजातीय दो मूकबधिर युवक युवती को जीवनसाथी बना दिया। धामनोद की रहने वाली शिवानी विश्वकर्मा और इंदौर के प्रदीप यादव दोनों ही जन्म से मूकबधिर हैं। सोशल मीडिया पर हुई मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई। इसके बाद दोनों परिवारों ने, इस रिश्ते को अपनाया और पूरे समाज के आशीर्वाद से शादी संपन्न हुई। शादी का आयोजन, धामनोद के बालाजी मंदिर गार्डन में हुआ, जहां धामनोद की एसडीओपी मोनिका सिंह सहित समाज के कई लोग इस अनोखे विवाह के साक्षी बने ओर नव युगल को आशीर्वाद दिया। सबकी आंखों में खुशी और भावुकता साफ झलक रही थी। क्योंकि मूकबधिर की शादी, दिल को छू लेने वाली है। शिवानी के पिता अनिल विश्वकर्मा भावुक नजर आए,जहां उन्होने कहा कि मेरी बेटी जन्म से मूकबधिर है, लेकिन आज उसे समझने वाला और साथ निभाने वाला जीवन साथी मिल गया।

धामनोद एसडीओपी मोनिका सिंह ने भी इस विवाह की सराहना करते हुए कहा यह विवाह समाज के लिए एक मिसाल है। दोनों मूकबधिर युवक, युवती ने एक-दूसरे को पसंद किया और परिवारों ने पूरे सम्मान और समर्थन से उन्हें साथ होने का मौका दिया।

यह विवाह इस बात की मिसाल है कि जब प्यार सच्चा हो, तो शारीरिक सीमाएं कोई मायने नहीं रखतीं। शिवानी और प्रदीप ने दिखा दिया कि समझ, भावनाएं और समर्पण किसी भी दिव्यांगत से कहीं अधिक शक्तिशाली होते हैं। यह शादी समाज के लिए एक गहरी सीख है – प्रेम में न भाषा की ज़रूरत होती है, न जाति की।

रिपोर्ट विकास त्रिवेदी…

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *