जबरन जमीन अधिग्रहण करने को लेकर ग्रामीणों व माइनिंग अधिकारियों के बीच हाथापाई

जबरन जमीन अधिग्रहण करने को लेकर ग्रामीणों व माइनिंग अधिकारियों के बीच हाथापाई

झाबुआ। जल जंगल जमीन पर केवल आदिवासी समाज का ही अधिकार है जमीन अधिग्रहण करने के पूर्व पंचायतों की सहमति जरूरी होगी केंद्र सरकार व राज्य सरकार ने आदिवासी बाहुल्य जिलों में सरकारी कानून पैसा एक्ट कानून व्यवस्था लागू भी की गई है कई ग्राम पंचायतो में ग्राम पंचायत की बीना सहमति के खदानों की नीलामी कई कंपनियों को की गई है इस प्रक्रिया में कई खामियों को लेकर आदिवासी संगठनों ने तहसील स्तर से जिला स्तर तक धरना प्रदर्शन भी किया मुद्दा लोक सभा से लेकर विधानसभा सत्र में प्रश्न काल के दौरान सांसद से लेकर विधायकों ने भी उठाया, इसके बावजूद माइनिंग ठेकेदारों के द्वारा खुदाई कराई जा रही है इसको लेकर ग्रामीणों और माइनिंग ठेकेदारों के बीच विवाद की स्थिति बनती जा रही है और आदिवासी संगठनों के पदाधिकारीयो पर हमले भी किए जा रहे हैं।

मामला झाबुआ जिले की थांदला विधानसभा क्षेत्र की जनपद पंचायत मेघनगर की ग्राम पंचायत रंभापुर के अंतर्गत माइनिंग को लेकर ग्रामीणों व माइनिंग ठेकेदारों के बीच सहमति न बनी तो ग्रामीणों जिसमे महिलाएं भी माइनिंग को लेकर विवाद तेज हो रहा है।
वही मध्य प्रदेश आदिवासी एकता परिषद के प्रांतीय महा सचिव dr कमल डामोर पर कुछ हमलावरों ने जान लेवा हमला भी किया, डामोर ने हमलावरों के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई , वही 15 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर माइनिंग अधिग्रहण को लेकर आदिवासी समाज संगठनों के द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा। वही dr कमल डामोर ने बताया कि हमारे आदिवासी समाज के कुछ खदानों के दलालों ने हमला किया है।

रिपोर्ट  शाबीर मंसूरी…

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