उज्जैन।महाकाल सवारी मार्ग को पिछले वर्ष ही चौड़ा करने के लिए स्वीकृति दे दी गई थी। और टेंडर भी निकाल दिया गया था लेकिन चौड़ी करण का विरोध करने के बाद स्थानीय रहवासी न्यायालय में पहुंचे और चौड़ीकरण पर स्टे लेकर आए जिसका निराकरण आज तक नहीं हो सका। इस वर्ष भी बाबा महाकाल की सवारी तंग गली और पुराने छोटे रास्तों से होते हुए महाकाल मंदिर पहुंचेगी।
प्रदेश का सबसे सुंदर मार्ग बनाने की थी योजना।
उज्जैन। सावन माह में प्रतिवर्ष हर सोमवार को उज्जैन में निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी का मार्ग अब वर्तमान में काफी छोटा पढ़ने लगा है। महाकाल मंदिर से लेकर वापस लौटने तक इस मार्ग की कुल लंबाई 4.8 किलोमीटर है। इस सवारी मार्ग को 15 से 24 मीटर तक चौड़ा किए जाने का टेंडर पिछले वर्ष मंजूर हो चुका था। लेकिन मार्ग के स्थानीय रहवासियों ने मुआवजे की उचित मांग को लेकर न्यायालय की शरण ली और इस मार्ग के चौड़ीकरण का काम रुक गया। पिछले वर्ष जब इस महाकाल मंदिर सवारी मार्ग को चौड़ा करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी उस समय उज्जैन स्मार्ट सिटी के माध्यम से यहां तैयारी की जा रही थी कि यह मार्ग प्रदेश का सबसे अच्छा मार्ग बनाया जाए। लेकिन अब इस वर्ष भी महाकाल की सवारी इसी मार्ग से निकलेगी।
पिछले वर्ष 6 से 10 मीटर चौड़े मार्ग को 15 से 24 मीटर चौड़ा करने की योजना भी स्वीकृत हो गई थी।
4.8 किलोमीटर लंबे महाकाल सवारी मार्ग काे 15 से 24 मीटर चौड़ा करने का कार्य इस साल भी नहीं हो सका कानूनी विवाद निपटाने को लेकर अधिकारियों ने इस मामले में कोई रुचि भी नहीं दिखाई। भीड़ प्रबंधन और यातायात की सुगमता के लिए उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी ने साल भर पहले 84 करोड़ रुपये से 4.3 किलोमीटर लंबे एवं 6 से 10 मीटर चौड़े महाकाल सवारी मार्ग को 15 से 24 मीटर चौड़ा करने की योजना स्वीकृत की थी।
84 करोड़ रुपए स्वीकृति के बाद ठेकेदार ने काम शुरू किया तो स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया आज तक नहीं हो सका काम शुरू।
प्रथम चरण में कंपनी ने माधव सेवा न्यास से चौबीस खंभा माता मंदिर तक, रामघाट से झालरिया मठ और बंबई वाला धर्मशाला तक 800 मीटर लंबा मार्ग 15 करोड़ रुपये से बनाने को ठेकेदार नियुक्त कर दिया गया था। धरातल पर ठेकेदार जब काम करने पहुंचा तो प्रभावित भवन मालिकों ने चौड़ीकरण का विरोध किया। विरोध के बाद मार्ग चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय रहवासियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की कोर्ट ने उनका पक्ष सुन स्टे जारी कर मार्ग चौड़ा करने की कार्रवाई पर रोक लगाई। इस रोक को हटाने के लिए नगर निगम आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ की तरफ से समय रहते जवाब प्रस्तुत न होने के कारण अब तक कानूनी विवाद नहीं निपटा नतीजा यह निकला कि इस वर्ष भी सवारी मार्ग चौड़ा नहीं हो सका। पिछले वर्ष ही यह मार्ग इस तरह बनाया जा रहा था की सवारी के बाद भी अगर श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरे तो उज्जैन की धार्मिक दृष्टि से यह मार्ग आकर्षण का केंद्र रहे। सवारी मार्ग पर मकान, दुकान का रंग एक किया जाना था। मार्ग के बीच में आने वाले मंदिरों पर भी सजावट की जानी थी। गणगौर दरवाजा, सती गेट, चौबीस खंभा माता मंदिर, चौरासी महादेव मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, जगदीश मंदिर सहित पुरातन स्वरूप में बनी सभी धरोहरों को फसाड लाइट लगाकर रात में चमकाया जाने की योजना कर ली गई थी। चौराहों को त्रिशुल, डमरू, नंदी जैसे कलाकृतियां स्थापित कर संवारा जाता। पूरा मार्ग में भूमिगत वाटर सप्लाय, सीवरेज, इलेक्ट्रिसिटी लाइन बिछाई जाती। मार्ग चौड़ीकरण के अवरोध के मामले में उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल ने बताया कि इस वर्ष नगर निगम द्वारा सिंहस्थ 2028 के लिए जो प्लान भेजा गया है उसमें सवारी मार्ग को चौड़ा कर बहुत सुंदर बनाने का प्लान भी मंजूर कराया जाएगा। पूरी कोशिश रहेगी की अगले वर्ष बाबा महाकाल की सवारी प्रदेश के सबसे अच्छे और आकर्षक रोड से ही निकले। आपने कहा कि उज्जैन की जनता भी इसके लिए पूर्ण रूप से सहयोग करे। महापौर ने कहा कि सवारी के लिए बेगम बाग चौराहे पर शिप्रा नदी पर बड़े गेट बनाए जाएंगे। इसके साथ ही नदी पर पालकी रखने और पूजन करने के लिए भी एक स्थल बनाया जाएगा। इसके लिए भी मंजूरी ली गई है । मार्ग इस तरह बनाया जाएगा कि महाकाल की सवारी देखने वाले भक्तों को आनंद की अनुभूती हो।



