खाचरोद क्षेत्र के मां बगलामुखी आश्रम के संत ने शासन प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है, और उन्होंने आश्रम छोड़कर हिमालय जाने की ठानी है। उनके इस कदम के पीछे मुख्य वजह है गौवंश के नाम पर भ्रष्टाचार करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न होना। संत का कहना है कि गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, और इस कारण उन्होंने यह कठोर कदम उठाया है।
गौशाला में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई न करने का आरोप…कलेक्टर नीरज सिंह ने वैटनरी को निलंबित किया…
आपको बता दें कि खाचरोद की चर्चित लेकोडियो गौशाला में 1028 गौवंश में से 498 गायब हो गए थे, जिसके बाद मां बगलामुखी शक्ति पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णानंद जी ने शासन प्रशासन से इस मुद्दे पर कार्रवाई करने की कई बार मांग की थी। उन्होंने इस मामले में मय सबूत लिखित शिकायतें भी दर्ज कराई थीं। इतना ही नहीं, स्वामी जी ने अपने जन्म दिवस पर गौवंश को श्रद्धांजलि अर्पित की और संतों का मुंडन भी कराया था। लेकिन, शासन प्रशासन ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। गौवंश की गणना के बाद, आवंटित राशि आधी कर दी गई, जबकि गौवंश के नाम पर सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने वाले गौशाला समिति के दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण से संत की आत्मा को गहरी ठेस पहुंची, और उन्होंने प्रण लिया कि जहां गौवंश की सुरक्षा नहीं हो रही, वहां रहना उचित नहीं है। 23 मार्च को, शाम 4:45 बजे, स्वामी जी ने आश्रम छोड़ने का फैसला किया। वहीं, कलेक्टर नीरज सिंह ने मीडिया में कहा कि गौशाला की जांच में वैटनरी डॉ. भुपेन्द्र पाटीदार को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने जांच कमेटी भी बनाई है, जो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
खाचरौद से असलम खान की रिपोर्ट


